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Sunday, 3 August 2025
ट्रंप की धमकियों के बावजूद भारत का स्पष्ट संदेश
नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों और वैश्विक भू-राजनीतिक दबाव के बावजूद भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि वह रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखेगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय भारत की ऊर्जा सुरक्षा, महंगाई नियंत्रण और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। यह कदम यह दर्शाता है कि भारत अब अपनी विदेश नीति और व्यापारिक निर्णयों में पूरी तरह आत्मनिर्भर और रणनीतिक रूप से सजग हो चुका है।
भारत सरकार के इस निर्णय ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के क्षेत्र में स्पष्ट संदेश दिया है – भारत अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र और संतुलित दृष्टिकोण रखता है। ऊर्जा सुरक्षा को राजनीतिक दबाव से प्रभावित नहीं किया जा सकता, और इस नीति में बदलाव केवल भारत की आंतरिक प्राथमिकताओं के आधार पर होगा।
ऊर्जा नीति में स्वायत्तता: भारत की प्राथमिकता
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि भारत की ऊर्जा रणनीति पूरी तरह से राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। देश की बढ़ती आबादी और औद्योगीकरण के कारण ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस मांग को पूरा करने के लिए भारत को सस्ते, भरोसेमंद और दीर्घकालिक आपूर्ति स्रोतों की आवश्यकता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम अपनी नीति किसी बाहरी बयान या दबाव से नहीं चलाएंगे। हमारी प्राथमिकता देशवासियों के लिए सुलभ और सस्ती ऊर्जा सुनिश्चित करना है।"
इसके अतिरिक्त, भारत अपनी ऊर्जा नीति में विविधता और स्थिरता को बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए सरकार विभिन्न देशों से तेल आयात के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर, पवन और बायोफ्यूल पर भी निवेश कर रही है। लेकिन जब बात तात्कालिक आवश्यकताओं की हो, तो रूस से मिलने वाला सस्ता तेल भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ है।
रूस-भारत तेल व्यापार: मजबूती की ओर
2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए, भारत ने अवसर की पहचान कर सस्ते रूसी कच्चे तेल का लाभ उठाया। इससे भारत को मुद्रास्फीति पर नियंत्रण, व्यापार घाटा कम करने और ऊर्जा लागत घटाने में मदद मिली।
रूस और भारत के बीच अब रुपये-रूबल में भुगतान की व्यवस्था और दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते इस साझेदारी को और मजबूती प्रदान कर रहे हैं। भारत की तेल रिफाइनरियां अब रूसी कच्चे तेल को रियायती दरों पर खरीदकर अपने मार्जिन में भी सुधार कर रही हैं।
इसके अलावा, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स में भी दोनों देशों ने समन्वय बढ़ाया है ताकि आपूर्ति में कोई बाधा न आए। रणनीतिक रूप से, भारत ने यह साबित किया है कि वह अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए पश्चिमी प्रतिबंधों से प्रभावित हुए बिना विकल्प तलाश सकता है।
आंकड़े बताते हैं बढ़ते रिश्तों की मजबूती
2021 में भारत की कुल कच्चे तेल आपूर्ति में रूस का योगदान मात्र 2% था, जो 2023 तक बढ़कर 40% से अधिक हो गया। यह बदलाव भारत की रणनीतिक दृष्टि और भू-राजनीतिक संतुलन साधने की क्षमता को दर्शाता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह निर्णय बेहद लाभदायक साबित हुआ है। सस्ते तेल ने घरेलू ईंधन कीमतों को स्थिर बनाए रखने में मदद की है, जिससे परिवहन, कृषि और उद्योग क्षेत्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसके परिणामस्वरूप महंगाई नियंत्रण में रही है, और देश की विकास दर को बनाए रखने में सहायता मिली है।
भारत के विभिन्न बंदरगाहों पर रूस से आयातित तेल की मात्रा में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है। कई निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भी रूस के साथ दीर्घकालिक अनुबंधों की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इससे व्यापारिक स्थिरता और आपूर्ति सुरक्षा को बल मिला है।
अमेरिका की नाराज़गी और भारत की स्पष्ट नीति
अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी चाहते हैं कि भारत रूस पर दबाव बनाए और उससे तेल आयात बंद करे। डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं ने भारत को चेतावनी भी दी है कि रूस से व्यापारिक संबंध अमेरिका-भारत साझेदारी को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी के दबाव में नीति नहीं बदलेगा। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "भारत शांति का समर्थक है, लेकिन हमारी जिम्मेदारी सबसे पहले अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करना है।"
भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि रूस से तेल आयात करना एक व्यावसायिक निर्णय है, न कि राजनीतिक समर्थन। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने लगातार यह रुख बनाए रखा है कि उसकी नीति तटस्थता और संतुलन पर आधारित है।
घरेलू अर्थव्यवस्था पर रूसी तेल का असर
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है और लगभग 85% तेल आयात करता है। रूस से तेल खरीदने के फैसले से भारत को विदेशी मुद्रा भंडार बचाने, पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें स्थिर रखने और सब्सिडी का बोझ कम करने में मदद मिली है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत रूसी तेल से दूरी बनाएगा तो महंगाई में उछाल, मुद्रा अवमूल्यन और विकास दर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
भारतीय नागरिकों पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा, खासकर मध्यम और निम्न वर्ग पर, जिनके लिए पेट्रोल, रसोई गैस और अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतें सीधा प्रभाव डालती हैं। इस प्रकार, रूसी तेल भारत की आम जनता के लिए राहत का एक प्रमुख स्रोत बन चुका है।
रणनीतिक स्वायत्तता की वैश्विक मिसाल
भारत की रूस के साथ साझेदारी यह दिखाती है कि वह विश्व मंच पर एक स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और संतुलित नीति पर अग्रसर है। भारत किसी एक खेमे का हिस्सा बनने के बजाय अपनी जरूरतों के अनुसार रणनीति तय कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, भारत की यह नीति विकासशील देशों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गई है। भारत न केवल अपने हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि वैश्विक संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
भारत का यह दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नया मॉडल प्रस्तुत कर रहा है, जहां राष्ट्र अपनी प्राथमिकताओं को केंद्र में रखकर वैश्विक संबंधों का प्रबंधन करते हैं। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता उसे 21वीं सदी में एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने की ओर ले जा रही है।
ऊर्जा नीति से वैश्विक नेतृत्व की ओर
रूस से तेल आयात केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि यह भारत की भविष्य की ऊर्जा रणनीति का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत ऊर्जा विविधता, हरित ऊर्जा ट्रांजिशन और रणनीतिक भंडारण के क्षेत्र में निवेश कर रहा है।
यह दर्शाता है कि भारत अब एक सक्रिय वैश्विक ऊर्जा खिलाड़ी है जो अपने हितों और वैश्विक स्थिरता दोनों को साथ लेकर चलने में सक्षम है।
सरकार की योजना में हाइड्रोजन आधारित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार, और स्मार्ट ग्रिड जैसी तकनीकों का समावेश भी शामिल है। इसके अलावा, भारत दक्षिण एशिया और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में ऊर्जा सहयोग को भी बढ़ावा दे रहा है, जिससे उसकी वैश्विक भूमिका और मज़बूत हो रही है।
निष्कर्ष: राष्ट्रहित सर्वोपरि
भारत ने फिर एक बार यह सिद्ध किया है कि वह वैश्विक दबावों के बीच भी अपने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखता है। डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बावजूद भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी नीति उसके लोगों की जरूरतों पर आधारित है, न कि अंतरराष्ट्रीय दबाव पर।
आने वाले वर्षों में, यह संतुलित दृष्टिकोण भारत को वैश्विक मंच पर और अधिक सम्मान व स्थायित्व प्रदान करेगा। भारत की नीति स्पष्ट है – जब बात देशहित की हो, तो कोई भी बाहरी शक्ति उसे विचलित नहीं कर सकती।
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