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Wednesday, 8 October 2025

अधिक सब्ज़ियां, कम मांस: इंसान और पृथ्वी दोनों के लिए फायदेमंद नई डाइट ट्रेंड

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में, जब हर कोई अपनी सेहत, मानसिक संतुलन और पर्यावरण के भविष्य को लेकर सजग है, तब एक नई डाइट ट्रेंड दुनिया भर में लोकप्रिय हो रही है; “More Veg, Less Meat”, यानी “ज़्यादा सब्ज़ियां, कम मांस।” यह केवल खाने की एक शैली नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है जो इंसान को स्वस्थ रखने और पृथ्वी को स्थायी (Sustainable) बनाने में अहम भूमिका निभाती है। यह ट्रेंड इस विचार पर आधारित है कि हमारी भोजन की आदतें सीधे तौर पर हमारे स्वास्थ्य, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को प्रभावित करती हैं। अगर हम रोज़ाना अपनी थाली में सब्ज़ियों, फलों और पौधों से मिलने वाले प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएं और मांस के सेवन को सीमित करें, तो यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर, स्वस्थ और संतुलित भविष्य की नींव रख सकता है।  क्यों ज़रूरी है ‘More Veg, Less Meat’? आज के समय में वैज्ञानिकों, पोषण विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का मानना है कि मांस का अत्यधिक सेवन न केवल स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, बल्कि पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों पर भी भारी बोझ डालता है। मांस उत्पादन के लिए पशुओं को पालना, उन्हें खिलाना और बड़ी मात्रा में भूमि व पानी की आवश्यकता होती है। 👉 उदाहरण के तौर पर, 1 किलो बीफ़ उत्पादन के लिए लगभग 15,000 लीटर पानी की ज़रूरत होती है, जबकि उतनी ही मात्रा में सब्ज़ियां उगाने के लिए इसका मात्र दसवां हिस्सा पानी पर्याप्त होता है। साथ ही, पशुपालन से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसें (GHG) जैसे मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड, जलवायु परिवर्तन में मुख्य भूमिका निभाती हैं। यदि हम ‘More Veg, Less Meat’ जीवनशैली अपनाएं, तो हम अपना कार्बन फुटप्रिंट 30-40% तक घटा सकते हैं। स्वास्थ्य के लिए फायदे ‘More Veg, Less Meat’ डाइट न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि हमारे शरीर के लिए भी लाभकारी है। पौधे आधारित आहार फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट्स, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर होता है, जो समग्र स्वास्थ्य में सुधार लाता है। इससे: दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित रहता है। वजन संतुलित रहता है और मोटापे की संभावना घटती है। पाचन तंत्र मजबूत होता है। ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहता है, जिससे डायबिटीज़ का खतरा कम होता है। शोध बताते हैं कि जो लोग नियमित रूप से फल, सब्ज़ियां और दालें खाते हैं, उनमें 30% तक हृदय रोगों का जोखिम कम होता है। इसके विपरीत, अत्यधिक मांस सेवन से उच्च रक्तचाप, फैटी लिवर और कोलन कैंसर जैसी समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है। पर्यावरण के लिए वरदान हमारा भोजन केवल हमारी प्लेट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी पृथ्वी के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। मांस उत्पादन उद्योग वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 14.5% हिस्सा है, जो परिवहन क्षेत्र से भी अधिक है। इसके अलावा, चरागाहों के लिए जंगलों की कटाई, मिट्टी की उर्वरता में कमी और जल स्रोतों पर दबाव भी इसी से जुड़ा है। यदि हम अधिक पौधे आधारित भोजन अपनाते हैं, तो: जल की बचत होगी। भूमि का संतुलित उपयोग संभव होगा। जैव विविधता (Biodiversity) को संरक्षण मिलेगा। ग्लोबल वार्मिंग में कमी लाने में मदद मिलेगी। हर छोटी पहल मायने रखती है। यदि हर व्यक्ति सप्ताह में केवल 2 दिन मांस छोड़ दे, तो यह सालाना लाखों टन कार्बन उत्सर्जन को कम कर सकता है। क्या पूरी तरह शाकाहारी बनना ज़रूरी है? कई लोग मानते हैं कि ‘More Veg, Less Meat’ का अर्थ पूरी तरह से मांस छोड़ना है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह डाइट संतुलन (Balance) पर आधारित है। आप फ्लेक्सिटेरियन (Flexitarian) डाइट अपनाकर सप्ताह में कुछ दिन मांस का सेवन कम कर सकते हैं। छोटे बदलाव जैसे ‘मीटलैस मंडे’ (Meatless Monday) से शुरुआत करें। धीरे-धीरे यह डाइट आपकी आदत में शामिल हो जाएगी और शरीर इसे आसानी से स्वीकार करेगा। भारतीय खानपान में ‘More Veg’ का महत्व भारत में यह डाइट अपनाना आसान है क्योंकि भारतीय भोजन संस्कृति पहले से ही सब्ज़ियों, दालों, अनाजों और मसालों पर आधारित है। राजमा-चावल, छोले, खिचड़ी, सांभर, पनीर टिक्का और मौसमी सब्ज़ियां,  ये सभी न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर हैं। भारतीय व्यंजनों में कई पारंपरिक रेसिपीज़ हैं जो पूरी तरह पौधे आधारित हैं, जैसे; बाजरे की रोटी, मूंग दाल चीला, वेज पुलाव, इडली-सांभर आदि। ये व्यंजन न केवल पेट भरते हैं बल्कि ऊर्जा और पोषण भी प्रदान करते हैं। कैसे करें शुरुआत? थाली में संतुलन रखें – थाली का आधा हिस्सा सब्ज़ियों से भरें। मीट की जगह प्लांट-बेस्ड प्रोटीन अपनाएं – जैसे टोफू, सोया, चना, दालें, मूंग, मसूर। स्थानीय और मौसमी उत्पाद चुनें – इससे कार्बन फुटप्रिंट घटेगा और स्वाद भी बेहतर होगा। नए स्वादों के साथ प्रयोग करें – नई वेज रेसिपीज़ आज़माएं ताकि डाइट रोचक बने। रेस्टोरेंट में हेल्दी विकल्प चुनें – वेज सूप, सलाद, या ग्रिल्ड सब्ज़ियां। इन सरल कदमों से आप धीरे-धीरे अपने भोजन को पौष्टिक और पर्यावरण-अनुकूल बना सकते हैं। 💪 निष्कर्ष: स्वास्थ्य, स्वाद और स्थिरता का संगम ‘More Veg, Less Meat’ केवल एक डाइट नहीं बल्कि एक जीवनशैली है। यह हमें याद दिलाती है कि हमारी छोटी-छोटी खाने की आदतें भी पृथ्वी पर बड़ा असर डाल सकती हैं। आज अगर हम अपने भोजन में थोड़ा बदलाव करें, तो कल हमारी धरती, हमारा शरीर और हमारी आने वाली पीढ़ियां इस बदलाव के फायदे महसूस करेंगी। समय आ गया है कि हम अपनी थाली को रंग-बिरंगी सब्ज़ियों, ताज़े फलों और पौधे आधारित खाद्य पदार्थों से भरें, ताकि ज़िंदगी में स्वाद भी हो, सेहत भी और स्थिरता भी। 

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